शिक्षक दिवस विशेष: एक मुलाक़ात “मोहन” को मुख्यमंत्री कि “मुरली” थमाने वाले गुरुओं से !

मुख्यमंत्री मोहन यादव जिस गति से प्रदेश में विकास के नये आयाम गढ़ पा रहे हैं इसकी वजह है अपने गुरुओं के प्रति उनकी कृतज्ञता और कभी न कम होने वाला सम्मान । ये कहना है उनके राजनैतिक और शैक्षणिक गुरु उज्जैन निवासी शील चंद जैन एवं गोपाल शर्मा का। 

मोहन शुरू से है ही एक दृढ़ संकल्पित एवं सीधा लड़का था और आज मुख्यमंत्री होने के बाद भी मोहन ने मुझसे कभी मुंह लगकर बात नहीं कि, इतना सरल और सहज स्वभाव एक प्रदेश के मुखिया का शायद ही किसी ने देखा हो । कॉलेज के दिनों में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन जैसे विक्रमोत्सव और क्षिप्रा परिक्रमा में अपनी लगन और मेहनत से मोहन ने जन–जन तक अपनी पहचान बनाई । विक्रमोत्सव की रूपरेखा तो मोहन ने मेरे घर बैठकर ही तैयार की थी। सबसे अच्छी बात यह है कि तरक्की के साथ–साथ अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता का भाव भी मोहन में बढ़ता चला गया । आज मोहन की कार्यशैली को देखकर मै यह कह सकता हूं कि उसने मुझे अपने गुरु होने का प्रतिफल या कहें तो गुरु दक्षिणा दे दी है । ये कहना है उज्जैन निवासी उनके राजनैतिक गुरु शील चंद जैन का ।

वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री मोहन को एम.ऐ और पीएचडी करवाने वाले गोपाल शर्मा कहते हैं कि पढ़ाई में मोहन जैसी लगन मैने आजतक किसी व्यक्ति में नहीं देखी चुकीं छात्र जीवन से ही सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने में रुचि रखने वाले मोहन ने पढ़ाई के साथ जो तारतम्य बैठाया वह अद्भुत है । मोहन ने प्रण किया था कि उन्हें जीवन में कभी भी शिक्षा से नाता नहीं तोड़ना है और जिसका नतीजा है कि वह आज प्रदेश के सबसे ज्यादा शिक्षित मुख्यमंत्री हैं । उनका सबसे बड़ा गुण हैं कि मोहन कभी आत्म प्रशंसा नहीं करते । मोहन शुरू से ही अपने काम के प्रति जोशीला अंदाज रखने वाले रहे हैं उन्होंने कभी भी अपने दायित्वों के आगे थकान को जगह नहीं दी। एक बार मैने कहा कि मोहन तुम आज भी बिना थके इतना काम कैसे कर लेते हो तब मोहन का जवाब था कि सर जब आप इस उम्र में भी आराम नहीं करते तो आपके शिष्य को आराम करना आखिर कैसे शोभा दे सकता है । मोहन की विनम्रता के कारण ही आज मोहन दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहे हैं। मोहन से मैने कहा कि तुम्हारे काम के प्रति जुनून को देखकर मुझे लगता है कि मैं नहीं बल्कि तुम मेरे गुरु बनने लायक हो ।

एक चीज़ बाकी रह गई जो मैं मोहन को सिखाना चाहता हूं कि उन्हें अपने संबोधन में “मेरे को” ये काम करना है कि जगह “मुझे” ये काम करना है बोलना चाहिए , अंत में मजाकिया अंदाज में गोपाल शर्मा कहते हैं ।

Loading


Discover more from जन विचार

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Related Posts

पटना गांधी घाट पर नहाने गये पांच युवक डुबे,तिन मरे,एक लापता

    पटना में मंगलवार सुबह गंगा स्नान के दौरान बड़ा हादसा हो गया. गांधी घाट पर नहाने के दौरान 6 लोग गंगा नदी में डूब गए, जिनमें तीन की…

Loading

Read more

Continue reading
कॉक्रोच पार्टी ज्वाइन के नाम पर अकाउंट कर रहे खाली

लो जी अब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम पर ठगी, पुलिस ने जारी की एडवाइजरी, वायरल हो रहा मैसेज आप भी हो जायें सतर्क।   कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के…

Loading

Read more

Continue reading

Leave a Reply

You Missed

पटना गांधी घाट पर नहाने गये पांच युवक डुबे,तिन मरे,एक लापता

पटना गांधी घाट पर नहाने गये पांच युवक डुबे,तिन मरे,एक लापता

कॉक्रोच पार्टी ज्वाइन के नाम पर अकाउंट कर रहे खाली

कॉक्रोच पार्टी ज्वाइन के नाम पर अकाउंट कर रहे खाली

सासाराम सिविल सर्जन के क्लर्क को निगरानी ने टांगा

सासाराम सिविल सर्जन के क्लर्क को निगरानी ने टांगा

बुरे फंसे विजय,नेता बने या अभिनेता?

बुरे फंसे विजय,नेता बने या अभिनेता?

Discover more from जन विचार

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading