भभुआ के रहने वाले आर के एजुकेशनल फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष व जी एस एकेडमी नौकरी वाला के संस्थापक इंजीनियर विकास विश्वकर्मा छात्र जीवन के बारे में बताते हुवे कहते हैं
छात्र जीवन में अनुशासित रहना छात्रों की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए उन्होंने बताया कि कोई भी राष्ट्र अपने नागरिक के कारण उन्नति के शिखर पर चढ़ता है और पतन के गर्त में गिरता है इसलिए किसी भी राष्ट्र की उन्नति के लिए नागरिकों का अनुशासीत रहना अनिवार्य है अनुशासन चाहे किसी में क्षेत्र का हो इसका महत्व अपार है
अनुशासन जीवन का वरदान है युवावस्था का श्रृंगार है तथा काया का प्राण है यह मानवीय चरित्र के मिल का पत्थर साबित होता है, स्वयं प्रकृति भी अनुशासन का पालन करने का उपदेश देता है विद्यार्थी जीवन में तो अनुशासन की आवश्यकता सबसे अधिक होती है क्योंकि यह वह समय होता है जब विद्यार्थी के व्यक्तित्व का निर्माण का प्रारंभ होता है कोई भी विद्यार्थी अनुशासन के महत्व को समझे बिना सफलता प्राप्त नहीं कर सकता है
अनुशासन का पालन करने वाले छात्र जिस काम को शुरू करते हैं उसे पूरा करने का हर संभव प्रयास करते हैं विद्यार्थी को बचपन से ही अनुशासन में रहना चाहिए छात्र जीवन में अनुशासन एक सेतु की तरह कार्य करता है
अनुशासन से छात्रों में धैर्य और समझदारी का विकास होता है समय पर निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है उनके कार्य का क्षमता का विकास होता है छात्रों में नेतृत्व की शक्ति जागृत होती है इसलिए विद्यार्थियों को चाहिए कि विद्यालय में रहकर विद्यालय के बनाये सभी नियमों का पालन करें
अध्यापक के निर्देशों का अमित पालन करें पढ़ाए गए सभी पाठकों का अध्ययन मन से करें गृह कार्य समय पर पूरा करें अनुशासन से ही आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं और जिम रौन ने भी कहा है कि अनुशासन लक्ष्य, और उपलब्धियां के बीच का सेतु है शिक्षा का उद्देश्य भी यही है कि छात्रों के जीवन को अनुशासित बनाना एक आदर्श अनुशासित समाज ही देश का विकास करने में सक्षम है, हमारे ऋषि मुनियों ने प्रारंभ से हमें अनुशासन का पाठ पढ़ाया जिसके कारण यह देश सोने का चिड़िया कहालाया।
यदि हम चाहते हैं कि एक बार फिर से सोने की चिड़िया कहलाए तो सबसे पहले हमें अनुशासन को अपनाना होगा तभी राष्ट्र उन्नति और विकास के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ेगा।
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