बिहार की राजनीति एक बार फिर सरगर्मी पर है। हालिया NDA के स्पष्ट जनादेश के बाद पूरे राज्य में सबसे बड़ा सवाल यही घूम रहा है कि क्या नीतीश कुमार दोबारा मुख्यमंत्री बनेंगे, या फिर बिहार भी महाराष्ट्र की तरह किसी राजनीतिक प्रयोग या सत्ता उलटफेर का गवाह बनेगा?
NDA को मिला जनादेश — किसके पक्ष में?
ताज़ा चुनावी नतीजों में NDA ने मजबूत प्रदर्शन किया है, जिसमें
BJP ने उल्लेखनीय सीटें जीतीं
JDU ने अपनी परंपरागत पकड़ बनाए रखी
छोटे दलों का समर्थन NDA को बहुमत के करीब लेकर गया, जनादेश साफ़ तौर पर NDA के पक्ष में है, और यही वजह है कि सरकार गठन पर चर्चाएँ और भी तेज़ हो गई हैं।
नीतीश कुमार — सत्ता का केंद्र या विकल्प?
नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति में सबसे निर्णायक चेहरे रहे हैं। वे अब तक 9 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं, प्रशासनिक अनुभव, विकास मॉडल और राजनीतिक संतुलन उनकी ताकत रही है
अब सवाल यह है:
क्या वे 10वीं बार मुख्यमंत्री बनेंगे?
भाजपा अभी सार्वजनिक रूप से यह कह रही है कि NDA एकजुट है, लेकिन बिहार की राजनीति में अंतिम फैसले अक्सर अंतिम समय में होते हैं।
क्या बिहार में होगा महाराष्ट्र जैसा खेल?
महाराष्ट्र में जैसे गठबंधन बदलना, अचानक समर्थन वापसी,
देर रात नई सरकार बनना
ये सारी घटनाएँ हुईं —
बिहार में भी ऐसी संभावनाओं पर चर्चा है।
कारण:
बिहार में गठबंधन राजनीति हमेशा से अस्थिर रही है
नीतीश कुमार कई बार पाला बदलने के लिए जाने जाते हैं
BJP की इच्छा है कि इस बार स्थिरता और साफ़ नेतृत्व हो
लेकिन अभी तक के संकेत बताते हैं कि NDA में फिलहाल कोई गंभीर असंतोष दिखाई नहीं देता।
NDA के अंदर क्या समीकरण बन सकते हैं?
जानकारों का मानना है कि तीन संभावित स्थितियाँ बन सकती हैं:
1️⃣ नीतीश कुमार फिर मुख्यमंत्री – NDA एकजुट (सबसे संभावित)
NDA उन्हें एक अनुभवी चेहरा मानकर 10वीं बार मौका दे दे।
2️⃣ BJP अपने चेहरे को आगे बढ़ाए
BJP यह संदेश देना चाहे कि अब वह अपने दम पर बिहार में नेतृत्व संभालने को तैयार है।
3️⃣ महाराष्ट्र जैसा राजनीतिक उलटफेर
अगर मतभेद बढ़ते हैं, तो अचानक हुए घटनाक्रम से सत्ता समीकरण बदल सकते हैं।
नीतीश कुमार की चुप्पी — क्या संकेत दे रही है?
नीतीश कुमार की ओर से कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है, लेकिन
उनकी पार्टी JDU साफ़ तौर पर NDA के साथ खड़ी दिख रही है
NDA के भीतर उन्हें “स्वाभाविक नेतृत्व” मानने की चर्चाएँ भी जारी हैं
निष्कर्ष — फैसला अभी बाकी
जनादेश NDA के पास है।
अनुभव नीतीश कुमार के पास है।
और रणनीति BJP के पास।
अब आने वाले दिनों में यह तय होगा कि
क्या बिहार में स्थिरता आएगी या फिर महाराष्ट्र जैसा कोई नया राजनीतिक ड्रामा देखने को मिलेगा?
क्या नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे?
बिहार की राजनीति के लिए यह फैसला ऐतिहासिक होने वाला है।
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