अंकीत चंदेल जौनपुर की कलम से
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार को आठ साल पूरे हो चुके हैं। 2017 में सत्ता संभालने के बाद से यह सरकार कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे, औद्योगीकरण, धार्मिक पर्यटन और किसान कल्याण जैसे मुद्दों पर फोकस करती रही है। आइए देखते हैं कि इन आठ वर्षों में यूपी में क्या बदलाव हुए और किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
योगी सरकार की प्रमुख उपलब्धियां
1. कानून-व्यवस्था में सुधार
अपराध और माफिया पर सख्त कार्रवाई (एनकाउंटर पॉलिसी, माफियाओं की संपत्तियों पर बुलडोजर, संगठित अपराध पर शिकंजा)। महिला सुरक्षा को लेकर मिशन शक्ति और एंटी-रोमियो स्क्वॉड जैसी पहल। पुलिस तंत्र को मजबूत किया गया, हालांकि कुछ जगहों पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठे।
2. बुनियादी ढांचे का विकास
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे जैसी सड़क परियोजनाएं। लखनऊ, कानपुर, आगरा और वाराणसी में मेट्रो सेवाओं का विस्तार। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकास। ग्रामीण इलाकों में सड़क और बिजली आपूर्ति में सुधार।
3. औद्योगिक निवेश और रोजगार
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के जरिए उद्योगों को आकर्षित किया गया। डिफेंस कॉरिडोर, इलेक्ट्रॉनिक्स हब और फिल्म सिटी जैसी योजनाओं की घोषणा। “एक जिला, एक उत्पाद” (ODOP) योजना से स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा। स्वरोजगार और स्टार्टअप को बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं।
4. धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विकास
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को सरकार की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और प्रयागराज कुंभ मेले का सफल आयोजन। पर्यटन स्थलों के विकास से स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिला।
5. कृषि और ग्रामीण विकास
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और फसल बीमा योजना से किसानों को लाभ। गन्ना किसानों को बकाया भुगतान में तेजी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को बढ़ावा।
चुनौतियां और आलोचनाएं
1. बेरोजगारी और सरकारी नौकरियां
सरकारी भर्तियों में पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी युवाओं के लिए चिंता का विषय रही।
रोजगार बढ़ाने पर सरकार ने जोर दिया, लेकिन सरकारी नौकरियों की सीमित संख्या से असंतोष भी बढ़ा।
2. शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति
सरकारी स्कूलों में आधारभूत सुधार हुए, लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की अभी भी जरूरत है।
कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बड़ी चुनौतियां सामने आईं।
ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं अभी भी कमजोर हैं।
3. जातिगत और राजनीतिक ध्रुवीकरण
सरकार पर विपक्ष द्वारा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के आरोप लगाए गए।
कुछ जातीय समूहों में आरक्षण और सरकारी नीतियों को लेकर असंतोष देखने को मिला।
4. महंगाई और आर्थिक असंतोष
महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी पर जनता की नाराजगी रही।
छोटे व्यापारियों पर बढ़ते सरकारी नियमों और GST का असर देखा गया।
योगी सरकार के आठ सालों में उत्तर प्रदेश ने कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के मामले में बड़े सुधार देखे हैं। धार्मिक पर्यटन और औद्योगिक निवेश को भी गति मिली है। हालांकि, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों पर अभी और काम करने की जरूरत बनी हुई है। सरकार की “बुलडोजर नीति” को जनता के एक वर्ग ने सराहा, जबकि कुछ इसे कठोर मानते हैं।
कुल मिलाकर, यूपी ने इन आठ सालों में विकास के रास्ते पर कदम बढ़ाए हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां अब भी 


बनी हुई हैं, जिन पर सरकार को ध्यान देना होगा।
(लेखक: अंकित चंदेल शोध पत्रकारिता के छात्र हैं)
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