दिसंबर के आखिरी दिन और जनवरी के पहले सप्ताह में मध्य प्रदेश जा कर ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर के दर्शन की इच्छा रखते हैं तो यह खबर आपके काम की है। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन के साथ विभिन्न प्रकार की व्यवस्थाएं तय करने के लिए मंगलवार को प्रशासनिक संकुल भवन में बैठक की।
समिति के अध्यक्ष व कलेक्टर नीरजकुमार सिंह ने बताया कि निर्धारित किया कि 31 दिसंबर और 1 जनवरी को ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन बुकिंग कर भस्मआरती करना पूरी तरह बंद रहेगा। इन दिनों के लिए चलित भस्मआरती का विकल्प रखा है। सुबह 4.15 बजे से श्रद्धालु कार्तिकेय मंडपम् से आरती का लाभ ले सकेंगे।
समिति का दावा है कि 40 से 45 मिनट में दर्शन हो जाएंगे। मंदिर प्रबंध समिति ने महाशिवरात्रि पर आए दर्शनार्थियों को देखते हुए दिसंबर के आखिरी दिनों और नए साल के पहले सप्ताह में 10 से 15 लाख दर्शनार्थी आने की उम्मीद जताई है।
25 दिसंबर से 5 जनवरी तक श्री कालभैरव मंदिर में गर्भगृह में प्रवेश पूर्ण रूप से बंद रहेगा। मंदिरों में ड्यूटीरत कर्मियों को बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ अच्छा व्यवहार करने की सीख दी गई है। कलेक्टर ने 29 दिसंबर से 5 जनवरी तक श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिफ्टवार ड्यूटी लगाई जाने के निर्देश दिए।
सामान्य दर्शनार्थी – प्रवेश : चारधाम मंदिर पार्किंग से प्रवेश द्वार संग्रहालय के समीप से नंदी द्वार भवन, फेसेलिटी सेंटर 1 टनल, शक्ति पथ, त्रिवेणी, श्री महाकाल, मानसरोवर, नवीन टनल 1, गणेश मंडपम् से श्री महाकालेश्वर के दर्शन करेंगे।
निर्गम : दर्शन के बाद आपातकालीन निर्गम द्वार से दर्शनार्थी बाहर जाने के लिए बड़ा गणेश मंदिर के समीप हरसिद्धि मंदिर तिराहा पुनः चारधाम मंदिर पर पहुंचकर अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करेंगे।
श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने पर फेसेलिटी सेंटर 1 से मंदिर परिसर निर्गम रैंप, गणेश मंडपम् और नवीन टनल दोनों ओर से श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था की जाएगी। श्रद्धालुओं की संख्या ओर अधिक होने पर फेसेलिटी सेंटर 1 से सीधे कार्तिकेय मंडपम् में प्रवेश करवाया जाएगा।
निर्गम : दर्शन के बाद द्वार नंबर 10 अथवा निर्माल्य द्वार के रास्ते बाहर की ओर प्रस्थान कराए जाने की व्यवस्था की जाएगी।
वीआईपी- प्रवेश : नीलकंठ द्वार से त्रिनेत्र यानी महाकाल लोक कंट्रोल रूम के सामने से होकर शंख द्वार, कोटितीर्थ कुंड के सामने से सभा मंडपम् से मंदिर में प्रवेश करेंगे।
निर्गम : दर्शन के बाद सभा मंडपम् से कोटितीर्थ कुंड, शंख द्वार से त्रिनेत्र होकर नीलकंठ द्वार से मंदिर के बाहर जाएंगे।
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