कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विधेयक पर विचार-विमर्श की आवश्यकता जताई और स्वतंत्र संस्थानों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। कांग्रेस ने इस कदम को चुनावी मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास बताया।
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विधेयक को मंजूरी मिलने के एक दिन बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि इस पर प्रतिक्रिया देने से पहले विचार-विमर्श जरूरी है। लोकसभा में संविधान पर आज होने वाली बहस से पहले, खरगे ने स्वतंत्र संस्थानों के दुरुपयोग का आरोप लगाया और कहा कि देश में शासन व्यवस्था अच्छी नहीं है। संसद का शीतकालीन सत्र 25 नवंबर से शुरू हुआ और 20 दिसंबर तक चलेगा। खरगे ने संयम बरतने की सलाह दी
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ बिल को लेकर मल्लिकार्जुन खरगे ने संयम बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि बिल पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से पहले पूरी तरह से विचार-विमर्श जरूरी है। खरगे ने मौजूदा सरकार पर स्वतंत्र संस्थानों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। उन्होंने चिंता जताई कि देश में शासन ठीक से नहीं चल रहा है। यह बयान उन्होंने लोकसभा में संविधान पर होने वाली बहस से पहले दिया। इससे पहले खरगे ने समिति को इस साल 17 जनवरी को पत्र लिखकर ‘एक देश, एक चुनाव’ के विचार का पुरजोर विरोध किया था। कांग्रेस ने ध्यान भटकाने का लगाया आरोप
वहीं कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ‘एक देश, एक चुनाव’ व्यवस्था लागू करने संबंधी विधेयक को मंजूरी दिये जाने के बाद आरोप लगाया कि सरकार चुनावी शुचिता पर उठ रहे सवालों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी के रुख में कुछ बदलाव नहीं हुआ है।इस बिल को लेकर इंडिया गठबंधन के बीच चिंताएं’
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा कि पहले भी उनकी पार्टी ने चुनाव, चुनावी प्रणाली और चुनावी शुचिता से संबंधित कई सवाल उठाए हैं। गोगोई ने ‘अब इस विधेयक को आने दीजिए, देखते हैं कि वे क्या करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन हमने पहले भी कहा है कि इस विधेयक के माध्यम से हमारे देश के संघीय चरित्र पर प्रभाव को लेकर इंडिया गठबंधन के बीच कई चिंताएं हैं। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी अपनी बात पर कायम नहीं रहे हैं, वह ‘एक देश, एक चुनाव’ की बात करते हैं लेकिन जब यह उनके लिए उपयुक्त होता है तो वह हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव अलग-अलग कराते हैं। वह गुजरात के चुनाव अलग से करवाते हैं।’ गोगोई का कहना था कि भारत के लोग बहुत बुद्धिमान हैं और समझते हैं कि पूरी चुनावी प्रक्रिया के संबंध में चुनाव आयुक्तों की भूमिका और उनकी नियुक्ति जैसे कई बड़े सवाल उठाए जाने की जरूरत है।
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