गांधी जयंती के अवसर पर कैमुर जिला पदाधिकारी सावन कुमार ने समाहरणालय कैमुर परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के प्रतिमा पर माल्यार्पण एवम् पुष्प चढ़ाकर उन्हें याद किया।
इसके साथ ही उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्व० लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर उन्हें भी माल्यार्पण किया और पुष्प अर्पित पर नमन किया।
जिलाधिकारी ने उन्हें याद करते हुए बताया कि गांधीजी प्रकृति से प्रेम करते थे और उनका मानना था कि प्रकृति के पास हर व्यक्ति की ज़रूरत पूरा करने के लिए सब कुछ है लेकिन व्यक्ति की लालच को पूरा करने के नहीं। यह लालच प्राकृतिक संसाधनों के लिए क्रूर और हिंसक है।सत्य और अहिंसा उनके दो बड़े जीवन मूल्य थे।
उन्होने बताया कि दुनिया भर के कारोबारी नेताओं ने गांधी जी के रूप में एक नए मैनेजमेंट गुरु की खोज की है। स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्र का नेतृत्व करते हुए, गांधी ने कुछ प्रबंधन रणनीतियों के लिए एक प्रकाश स्तंभ रखा जो आज के कॉर्पोरेट जगत में महत्वपूर्ण हैं।
महात्मा को अब देश के लिए स्वतंत्रता दिलाने वाले एक राजनीतिक नेता से कहीं अधिक के रूप में महसूस किया जा रहा है। उन्हें एक कुशल रणनीतिकार और एक अनुकरणीय नेता के रूप में देखा जा रहा है, जिनके विचारों और रणनीतियों का कॉर्पोरेट जगत, विशेष रूप से भारत में बहुत महत्व है।महात्मा गांधी एक आदर्श प्रबंधन गुरु थे।
सत्य और अहिंसा उनके सिद्धांत के दो प्रमुख घटक थे।महात्मा ने आम आदमी, एक औसत भारतीय को अपने सिद्धांतों का पालन करने के लिए प्रेरित किया और स्वतंत्र भारत की लड़ाई जीतने के लिए जनता का नेतृत्व किया। नवाचार और रचनात्मकता, जो उनकी “आंतरिक आवाज़” से बहने वाले नैतिक अधिकार पर आधारित थी, उन्होंने जो भी अभियान शुरू किया, उसका आधार बना।तभी तो अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा “आने वाली पीढ़ियाँ शायद ही इस बात पर विश्वास करेंगी कि इस तरह का कोई व्यक्ति कभी धरती पर चला था।”

उन्होंने कहा कि गांधी की अहिंसा की अवधारणा और उनके उच्च नैतिक मानक आज के युवाओं को अपनाने चाहिए।
2 अक्टूबर के दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ-साथ देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के भी जयंती मनाते हैं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शास्त्री जी को उनकी सरलता, सादगी, शालीनता, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी, मजबूत व्यक्तित्व और अद्भुत कार्य क्षमता के लिए याद किया जाता है।
जब भारतीय सेना ने 1965 के युद्ध में पाकिस्तान को धूल चटाई तब देश के प्रधानमंत्री शास्त्री जी थे।उन्होंने जय जवान जय किसान का नारा 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान दिया था। इसका मकसद जवानों और किसानों को मनोबल बढ़ाना था। इस नारे ने भारत की सुरक्षा और कृषि को एक नई दिशा दी और देशवासियों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।यह नारा आज भी देश के सैनिकों और किसानों की अहमियत पर रोशनी डालती है।
उन्होंने बताया कि अनाज के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने और हरित क्रांति लाने में भी शास्त्री जी का अहम योगदान है।1960 के दशक में भारत जब खाद्यान्न संकट से घिरा हुआ था तब लाल बहादुर शास्त्री ने हरित क्रांति की नींव रखते हुए कृषि सुधारो का समर्थन किया था।उन्होंने भारत को दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए श्वेत क्रांति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।इस तरह वे श्वेत क्रांति और हरित क्रांति के प्रणेता बने।उन्होंने आज के युवाओं से अपील की की भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री के विचार और सोच हमारा जीवन बदल सकती है।
इस अवसर पर अपर समाहर्ता ओम प्रकाश मंडल,उप विकास आयुक्त,निदेशक डीआरडीए,जिला पंचायती राज पदाधिकारी,जिला परिवहन पदाधिकारी,वरीय उप समाहर्ता सामान्य शाखा सहित सभी जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं समाहरणालय के कर्मी उपस्थित थे।
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