मध्‍य प्रदेश में यूपीएससी को EWS के उम्मीदवारों के लिए आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट देने का आदेश

ईडब्ल्यूएस भी आरक्षित श्रेणी है, इसलिए इस श्रेणी के उम्मीदवारों को भी यह लाभ दिया जाना चाहिए। यह भी तर्क दिया गया कि पूर्व में मध्य प्रदेश शिक्षक चयन परीक्षा-2024 में संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के आधार पर ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट का प्रवधान किया जा चुका है।

हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा-2025 में ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को आयुसीमा में पांच वर्ष की छूट देने का अंतरिम आदेश दिया है। हाई कोर्ट यूपीएससी को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता व अन्य समान उम्मीदवारों के आवेदन स्वीकार करें। कोर्ट ने यह भी कहा है कि बिना अनुमति इन उम्मीदवारों के रिजल्ट घोषित नहीं करें। मामले की मंगलावार को पुन: सुनवाई होगी।

याचिकाकर्ता सतना निवासी आदित्य नारायण पांडेय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल व मनीष सिंह ने पक्ष रखा।

उन्होंने दलील दी कि अन्य सभी आरक्षित वर्ग एससी, एसटी व ओबीसी को आयुसीमा में छूट दी जाती है। ईडब्ल्यूएस भी आरक्षित श्रेणी है, इसलिए उन्हें भी उक्त लाभ दिया जाना चाहिए।

बताया गया कि कुछ दिन पूर्व शिक्षक भर्ती के मामले में ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को आयुसीमा में छूट का लाभ देने के निर्देश दिए थे।

दरअसल, संघ लोक सेवा आयोग ने 979 पदों के लिए 25 मई 2025 को प्रारंभिक और 22 अगस्त 2025 को मुख्य परीक्षा आयोजित की है।

आयोग ने 22 जनवरी को परीक्षा कार्यक्रम घोषित किया है। इसी दिन से फार्म भरे जा रहे हैं, जो 18 फरवरी तक जमा किए जा सकेंगे। एप्लीकेशन फॉर्म में त्रुटि होने पर अभ्यर्थी 19 से 25 फरवरी तक संशोधन कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने 10 फरवरी को माध्यमिक व प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2024 में उन्हें आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट दिए जाने की महत्वपूर्ण अंतरिम राहत की व्यवस्था दी थी।

अधिवक्ता के अनुसार इस अंतरिम आदेश के बाद अब उक्त परीक्षा में ईडब्ल्यूएस वर्ग के 45 वर्ष तक के उम्मीदवार शामिल हो सकेंगे। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद नियत की गई है।

प्रकरण रीवा निवासी पुष्पेंद्र द्विवेदी व अन्य की ओर से दायर किया गया है।

उनकी ओर से अधिवक्ता धीरज तिवारी व ईशान सोनी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि शिक्षक चयन परीक्षा की रूल बुक की कंडिका 7.1 और 7.2 में ईडब्ल्यूएस को आरक्षित वर्ग माना गया था।

लेकिन कंडिका 6.2 में जहां अन्य आरक्षित वर्गों (एससी, एसटी, ओबीसी) को आयु सीमा में छूट दी गई थी, वहीं ईडब्ल्यूएस वर्ग को छूट से बाहर रखा गया था।

इस पर भर्ती नियम की संवैधानिकता को चुनौती देकर यह याचिका दायर की गई।

याचिका में दावा किया गया है कि ईडब्ल्यूएस वर्ग को आयु सीमा में छूट न देना भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 समानता का अधिकार और अनुच्छेद-16 सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता का उल्लंघन है।

सुनवाई के उपरांत हाई कोर्ट ने उक्त अंतरिम आदेश देते हुए मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद नियत कर दी है।

सरकारी विभागों में सीपीसीटी की अनिवार्यता समाप्त हो

सरकारी विभागों में पदस्थ तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों को कंप्यूटर प्रवीणता प्रमाणन परीक्षा (सीपीसीटी)अनिर्वाय कर दी गई है जिसके कारण उन कर्मचारियों की मुसीबत बढ़ गई है जिन्हें कंप्यूटर का ज्ञान नहीं है।

कर्मचारी संगठनों ने तृतीय श्रेणी वर्ग के लिए सीपीसीटी की परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त किए जाने की मांग की है। मध्य प्रदेश राज्य अधिकारी कर्मचारी संघ जिला शाखा जबलपुर के संयोजक दिलीप सिंह ठाकुर ने जारी बयान में बताया कि सीपीसीटी परीक्षा उत्तीर्ण न करने पर सेवा से पृथक किया जा रहा है जबकि कई लिपिक ऐसे हैं जो कंम्प्यूटर कौशल में दक्ष नहीं।

लिहाजा सीपीसीटी अनिवार्य कर उन्हें सेवा से पृथक न किया जाए और पृथक किए गए सहायक ग्रेड की सेवा बहाल की जाए।

संघ के भास्कर गुप्ता, राशिद अली, विश्वनाथ सिंह, आकाश भील, आदेश विश्वकर्मा, सुरेंद्र परसते, धर्मेंद्र परिहार, नितिन तिवारी, ऋषि पाठक, दुर्गेश खातरकर, अजब सिंह, विष्णु झारिया, सुल्तान सिंह, देवराज सिंह, इमरत सेन, गंगाराम साहू, चंद्रभान साहू, भोगीराम चौकसे, सतीश खरे आदि ने सरकार से उपरोक्त मांगो का शीघ्र निराकरण करने की मांग की है।

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