प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को कुवैत का दो दिवसीय दौरा पूरा कर वापस आ गए. पीएम मोदी को विदा करने कुवैत के प्रधानमंत्री अहमद अब्दुल्लाह अल-अहमद अल-सबाह एयरपोर्ट आए थे।पीएम मोदी ने इस दौरे को ऐतिहासिक बताया है और कहा है कि दोनों देश अब रणनीतिक साझेदार बन गए हैं। नरेंद्र मोदी का कुवैत दौरा किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का 43 साल बाद हुआ. इससे पहले 1981 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी गई थीं. पीएम मोदी के कुवैत दौरे को अरब देशों के मीडिया में भी काफ़ी तवज्जो मिली है। कुवैत की कुल 43 लाख की आबादी में 10 लाख से ज़्यादा भारतीय हैं और यहाँ के कुल श्रमिकों में 30 प्रतिशत भारतीय हैं. कहा जा रहा है कि पीएम मोदी के दौरे से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में और गति आएगी। सऊदी अरब से प्रकाशित होने वाले अंग्रेज़ी दैनिक अरब न्यूज़ से थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में स्ट्रैटिजिक स्टडीज प्रोग्राम के उपनिदेशक कबीर तनेजा ने कहा कि भारत और कुवैत के बीच अब रक्षा साझेदारी बढ़ेगी। कबीर तनेजा ने कहा, ”रक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी बढ़ेगी. इसके अलावा फार्मा सेक्टर से भारत का निर्यात बढ़ेगा। 2023 में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा फार्मा उत्पादक देश था।”कुवैत नेशनल कमिटी फॉर द इंप्लीमेंटेशन ऑफ एजेंडा 2030′ के अध्यक्ष डॉ ख़ालिद ए मेहदी ने पीएम मोदी के दौरे को लेकर कुवैत टाइम्स में एक लेख लिखा है। इस लेख में डॉ मेहदी ने कहा है, ”2023-2024 में दोनों देशों के बीच व्यापार 10.479 अरब डॉलर का रहा। भारत का कुवैत में निर्यात 2.1 अरब डॉलर का रहा और इसमें सालाना 34.78 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2022 में तो भारत ने कुवैत से 15 अरब डॉलर के कच्चे तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पाद के आयात किए थे। ” डॉ मेहदी ने लिखा है, ”दोनों देशों के बीच संबंध कारोबार तक ही सीमित नहीं है. कुवैत में 10 लाख से ज़्यादा भारतीय रहते हैं. यह ग़ैर अरब प्रवासियों की सबसे बड़ी संख्या है। कुवैत में भारत के न केवल मज़दूर हैं बल्कि बड़ी संख्या में इंजीनियर और फ़ाइनैंस सेक्टर के प्रोफ़ेशनल भी हैं।”
“दोनों देशों के बीच संबंध सदियों पुराना है. भारत कुवैती परिवारों और कारोबारियों के लिए शिक्षा के साथ कारोबार का पसंदीदा देश रहा है. 20वीं सदी में बॉम्बे कुवैतियों के लिए एक अहम बिज़नेस सेंटर था. कुवैत के लोगों का बॉम्बे में घर और कंपनी होना बहुत पुरानी बात है डॉ मेहदी कहते हैं, ”मुंबई के मोहम्मद अली स्ट्रीट पर कुवैतियों की दुकानें और दफ़्तर भरे पड़े हैं. ‘मोहम्मद अली स्ट्रीट’ एक कुवैती ड्रामा भी है, जो दोनों देशों के संबंधों की गहराई को दिखाता है.भारत कुवैत की अहम हस्तियों का जन्म स्थान भी रहा है। पीएम मोदी का दौरा तब हुआ है, जब गल्फ़ कोऑपरेशन काउंसिल यानी जीसीसी की अध्यक्षता कुवैत के पास है।” डॉ हाइला अल-मेकाइमी कुवैत यूनिवर्सिटी में राजनीतिक विज्ञान की प्रोफ़ेसर हैं। उन्होंने कुवैत टाइम्स में मोदी के दौरे पर लिखा है, ”2014 में भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने विदेश नीति को नया आकार दिया। खाड़ी के देश भारत के विस्तृत पड़ोसी हैं और पीएम मोदी ने यहां ख़ासा ध्यान दिया।” “जीसीसी का कुवैत आख़िरी देश है, जहाँ पीएम मोदी ने दौरा किया है. इससे पहले वह जीसीसी के बाक़ी पाँच देशों का दौरा कर चुके हैं. गल्फ़ से भारत के ऐतिहासिक संबंध रहे हैं. भारत से गल्फ़ का संबंध ऊर्जा, ट्रेड और प्रवासियों से आगे बढ़कर रक्षा, निवेश और राजनीति तक पहुँच गया है।”
News Source – BBC hindi
![]()
Discover more from जन विचार
Subscribe to get the latest posts sent to your email.




