दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े धार्मिक उत्सवों में से एक कुंभ मेला, गहरा आध्यात्मिक महत्व रखता है। प्राचीन पौराणिक कथाओं में निहित यह मेला आस्था और परंपरा के उत्सव में लाखों भक्तों को एक साथ लाता है। महाकुंभ मेले के दौरान सबसे महत्वपूर्ण शाही स्नान करना महत्वपूर्ण होता है। यह त्रिवेणी संगम पर होता है जहाँ लाखों तीर्थयात्री पवित्र डुबकी लगाने के लिए एकत्रित होते हैं। प्रयागराज में आगामी महाकुंभ, जो हर 12 साल में होता है, 13 जनवरी से शुरू होगा और 26 फरवरी, 2025 को समाप्त होगा। इसी को लेकर आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्व का सबसे बड़े संस्कृत समागम महाकुंभ मेला के सफलता के लिए त्रिवेणी घाट पर गंगा आरती कर करोड़ों की परियोजनाओं का भी करेंगे शिलान्यास। प्रधानमंत्री मोदी अमृत काल के सिद्धि योग में मानवता की अमूर्त धरोहर के तौर पर विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक समागम के रूप में महाकुंभ की सफलता के लिए कुंभ कलश का पूजन करेंगे। वे 5500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास भी करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज संगम पर जब पहुंचेंगे, तब अमृत काल लग चुका होगा। अमृत काल के सिद्धि योग में वह मानवता की अमूर्त धरोहर के तौर पर विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक समागम के रूप में महाकुंभ की सफलता के लिए कुंभ कलश का पूजन करेंगे। पूजन में उनके साथ राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी जेटी पर मौजूद रहेंगे। इसके साथ ही पीएम मोदी 55 सौ करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री संगम पर दोपहर 12:15 बजे पहुंचेंगे। काली मछली निशान वाले तीर्थ पुरोहित पं. दीपू मिश्रा के आचार्यत्व में सात वैदिक आचार्य पूजा कराएंगे। अमृत कलश की पूजा के लिए तैयार की गई भव्य जेटी पर मंत्रोच्चार के साथ पहले गौरी-गणेश का पूजन होगा। प्रधानमंत्री महाकुंभ के वैश्विक आयोजन की सफलता की कामना करने के साथ ही विश्व शांति के लिए भी मां गंगा से प्रार्थना करेंगे। करीब 20 मिनट तक पूजा के बाद पीएम गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर मां गंगा की आरती भी उतारेंगे।
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