धनतेरस 2024 में 29 अक्टूबर को मनाई जाएगी। यह दिवाली महोत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है, और यह अश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन का महत्व इस कारण है कि यह धन और समृद्धि के देवता भगवान धन्वंतरि के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए सोने, चांदी, और बर्तन खरीदना शुभ होता है।
शुभ मुहूर्त
धनतेरस के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त:
- प्रदोष काल: 17:59 से 20:37
- वृषभ काल: 17:59 से 19:55
दिवाली 2024
दिवाली 2024 में 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी। दिवाली या दीपावली पांच दिवसीय त्योहार है जो धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलता है। यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश की विजय, अज्ञानता पर ज्ञान की विजय, और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इस दिन भगवान राम के अयोध्या लौटने और रावण पर विजय प्राप्त करने के उपलक्ष्य में दीप जलाए जाते हैं।
शुभ मुहूर्त
दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त:
- लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: 17:57 से 19:53
- प्रदोष काल: 17:35 से 20:12
- वृषभ काल: 17:57 से 19:53
धनतेरस के महत्व
धनतेरस के दिन लोग अपने घरों को स्वच्छ और सजाकर मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि का स्वागत करते हैं। इस दिन लोग सोना, चांदी, और नए बर्तन खरीदते हैं, क्योंकि यह माना जाता है कि ऐसा करने से समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
दिवाली का महत्व
दिवाली की रात को लोग अपने घरों को दीपों, रंगोली, और लाइट्स से सजाते हैं। इस दिन लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व होता है, जिससे घर में सुख, समृद्धि, और शांति का वास होता है। पटाखे फोड़ना, मिठाइयाँ बांटना, और नए कपड़े पहनना दिवाली के प्रमुख गतिविधियों में शामिल है। इस दिन लोग एक-दूसरे को बधाइयाँ देते हैं और अपने संबंधों को मजबूत करते हैं।
रिवाज और परंपराएं
धनतेरस और दिवाली के अवसर पर कई रिवाज और परंपराएं निभाई जाती हैं। धनतेरस पर, लोग अपने घर के मुख्य दरवाजे पर दीप जलाकर भगवान धन्वंतरि और देवी लक्ष्मी का स्वागत करते हैं। दिवाली के दिन, पूरे परिवार के साथ लक्ष्मी पूजा की जाती है, और घर के हर कोने को प्रकाशमय बनाने के लिए दीपक जलाए जाते हैं।
धार्मिक पहलू
धनतेरस का धार्मिक महत्व भगवान धन्वंतरि से जुड़ा हुआ है, जो देवताओं के वैद्य माने जाते हैं और जिनका जन्म समुद्र मंथन के दौरान हुआ था। दिवाली का धार्मिक महत्व भगवान राम की अयोध्या वापसी और रावण पर विजय प्राप्त करने से जुड़ा है। इसके अलावा, इस दिन भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व है।
उत्सव और आनंद
धनतेरस और दिवाली का त्योहार न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ मिलकर इन त्योहारों को मनाते हैं और खुशियों का आदान-प्रदान करते हैं।
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